इनकी नजर में 2010

01/01/2011 12:14

 शायर जीते

साल 2010 से जुड़ी कई यादें हैं मेरे जेहन में। सबसे बड़ी बात तो यह है कि इस साल गीतकार और गायक रॉयल्टी से जुड़ी एक बड़ी जंग को एक खास मुकाम पर ले जाने में कामयाब रहे। गीतकारों और गायकों की रॉयल्टी अकसर कांटेक्ट के नाम पर छीन ली जाती थी, लेकिन इस साल सरकार इस दिशा में गंभीर हुई और इससे संबंधित कानून पर काम भी किया। इस साल यों तो कई गीत सुनने को मिले, लेकिन मेरे जेहन से लाइफ इन ए मेट्रो का गाना इन दिनों दिल मेरा मुझसे ये कह रहा जाता ही नहीं। इसके गीतकार सईद काजमी से आनेवाले साल में और ज्यादा उम्मीदें हैं। आनेवाले साल में प्रसून जोशी और अरशद कामिल से भी खूब उम्मीदें हैं। इस साल मैं राज्यसभा के लिए चुन लिया गया। यह पहली बार है, जब पति-पत्नी की जोड़ी एक साथ राज्यसभा के सदस्य हैं। तरकश के बाद शायरी पर मेरी दूसरी किताब लावा जल्द ही छप जाएगी। मैंने अपने यादगार डेढ़ सौ गानों को एक किताब में समेटा है। यह किताब भी जल्द ही मेरे चाहने वालों के सामने आएगी।
जावेद अख्तर, गीतकार
कानून के हाथ
गोपाल सुब्रमण्यम, महाधिवक्ता
आदर्श और नीतियों का पतन ही समाज को अवनति की ओर ले जाता है। अकेली सरकार या सरकारी विभाग अपने कर्तव्यों को निभाकर देश को विकास के रास्ते पर नहीं ले जा सकते। इसके लिए सभी नागरिकों को एकजुट होकर भ्रष्टाचार, अपराध और अन्याय के खिलाफ अलख जगाना होगा। बीते दशक में लोगों में काफी बदलाव आया है। न्याय के प्रति जागरूकता बढ़ी है। लेकिन तकनीकी और वैज्ञानिक रूप से बदलते समाज में चेतना कहीं खोती जा रही है। सुविधाएं हों या फिर कानून, हर स्तर पर बदलाव हो रहे हैं। इसके बावजूद सुविधाएं सही लोगों तक नहीं पहुंच रहीं।
 
दरअसल पीड़ित लोगों की मदद करने और अन्याय के खिलाफ लड़ने के लिए कोई समय नहीं देना चाहता। एक वकील के तौर पर मैं पिछले कई वर्षों से अन्याय के खिलाफ लड़ रहा हूं। आशा करता हूं कि सभी लोग इस नैतिक जिम्मेदारी को स्वीकार करेंगे कि उन्हें हर स्तर पर अन्याय के खिलाफ लड़ना चाहिए। 
भ्रष्ट हौसले मुझे तो 2010 को याद करते वक्त जेहन में बस घोटालों की गूंज सुनाई देती है। ऐसा लगा मानो हम घोटालों का रिकॉर्ड बनाने जा रहे हैं। कॉमनवेल्थ की बात हो या फिर 2 जी स्पेक्ट्रम घोटाले की, देश की फजीहत खूब हुई। क्या कभी इन घोटालों से हमारे देश को निजात मिलेगी? कॉमनवेल्थ गेम्स भगवान की दया से ठीक-ठाक निपट गए, लेकिन उसकी आड़ में अरबों के जो घपले हुए, उनका क्या? मैं सकारात्मक नजरिया रखता हूं, इसलिए मानता हूं कि हर रात के बाद सुबह जरूर आती है। बीता साल बेशक मन को दुखी कर गया। लेकिन मुझे यकीन है कि नया साल नई सुबह लेकर आएगा। घोटाला करने वालों को कानून सही सबक सिखाएगा, मैं तो यही उम्मीद करूंगा। लेकिन जनता को न्याय मिलना भी तो जरूरी है। मैं चाहूंगा कि देश को दगा देने वाले उन लोगों पर नकेल कसी जाए, जिन्होंने अपनी काली कमाई छिपाने के लिए विदेशों में खाते खोल रखे हैं। उनकी काली कमाई को जरूरतमंदों में बांटा जाए। उनकी संपत्ति नीलाम की जाए। तब जाकर देश से दगा करने वालों के हौसले कुछ पस्त होंगे। प्रह्लाद कक्कड़, एड गुरु
महंगाई डायन

प्रसून जोशी, गीतकार
इस साल जो गीत मेरे जेहन को छू गया, वह है पीपली लाइव का महंगाई डायन खाए जात है। सोचिए, महंगाई को किस खूबसूरती से डायन कहा गया है इस गीत में। सिर्फ एक गीत ने हमारे जीवन को इस साल एक नया मुहावरा दे दिया है। ऐसा लगता है कि फिल्मों ने अपनी तरह से आम भारतीय जीवन को वाणी दी है। जहां तक मेरे अपने जीवन का सवाल है, मेरे लिए यह साल काफी यादगार रहा। मुझे इस वर्ष मेकैन क्रिएटिव लीडरशिप काउंसिल का ग्लोबल चेयरमैन नियुक्त किया गया। पहली बार किसी भारतीय की इस पद पर नियुक्ति हुई है। कॉमनवेल्थ गेम्स से भी मैं क्रिएटिव तौर पर जुड़ा रहा। फिल्मों में भी मैं सक्रिय रहा और ब्रेक के बाद के गाने लिखे। मिल्खा सिंह पर बनने वाली फिल्म की स्क्रिप्ट भी मैं लिख रहा हूं। अगर साल 2011 की बात की जाए, तो मुझे लगता है कि यह साल भी 2010 की तरह काफी दिलचस्प रहने वाला है। इस साल मैं कई ऐसे देशों की यात्राएं करूंगा, जहां पहले कभी नहीं गया, जैसे लैटिन अमेरिकी देश। व्यक्तिगत जीवन में जो रोमांच और चुनौतियां होती हैं, वे आखिरकार हमारे देश और समाज की भी होती हैं।

 
 



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