कामयाबी के पांच सूत्र एपीजे अब्दुल कलाम

01/01/2011 11:45

 


हम
एक नए दशक के सफर की शुरुआत कर रहे हैं। इस मौके पर मैं नए वर्ष 2011 के लिए अपने विचार आपके साथ साझा करना चाहता हूं। मैं तमाम युवाओं को नववर्ष की बधाई देना चाहता हूं। बेशक, पिछले दशक ने हमें सिखाया कि हम अर्थव्यवस्था से लेकर जिंदगी के हर मोरचे परकैसे सफलता अर्जित कर सकते हैं और कैसे नाकाम हो सकते हैं। लिहाजा, वर्ष 2011 संकल्प का वर्ष होना चाहिए। हमें संकल्प लेना चाहिए कि हम भारत के नागरिक, ईमानदारी से काम करेंगे और ईमानदारी से सफलता हासिल करेंगे। इस मौके पर मैं नववर्ष पर लिखी मेरी कविता आपसे साझा करना चाहता हूं

महान राष्ट्र का जन्म
सुदूर खूबसूरत लालिमा ने/ आकाशगंगा को ढक लिया है/ यह हमारी आकाशगंगा है/ सारे सितारे हैरत से पूछ रहे हैं/
कहां से रही है आखिर यह खूबसूरत रोशनी/ आकाशगंगा में हर कोई पूछ रहा है/ किसने बिखरी ये रोशनी, कौन है वह/ मेरे मित्रो, मैं जानता हूं उसे/ आकाशगंगा के मेरे मित्रो, मैं सूर्य हूं/ मेरी परिधि में आठ ग्रह लगा रहे हैं चक्कर/ उनमें से एक है पृथ्वी/ जिसमें रहते हैं छह अरब मनुष्य/ सैकड़ों देशों में/ इन्हीं में एक है महान सभ्यता/ भारत 2020 की ओर बढ़ते हुए/ मना रहा है एक महान राष्ट्र के उदय का उत्सव/ भारत से आकाशगंगा तक पहुंच रहा है/ रोशनी का उत्सव/ एक ऐसा राष्ट्र, जिसमें नहीं होगा प्रदूषण/ नहीं होगी गरीबी, होगा समृद्धि का विस्तार/ शांति होगी, नहीं होगा युद्ध का कोई भय/ यही वह जगह है, जहां बरसेंगी खुशियां...

देश के 50 करोड़ से ज्यादा युवाओं को इसी खूबसूरत राष्ट्र के उदय के लिए समर्पित होना चाहिए।


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