रक्तदान और अंगदान हराम : दारूल उलूम देवबं

23/11/2010 23:28

 जरूरतमंदों का जीवन बचाने के लिए रक्तदान की अपीलों के बीच दारूल उलूम देवबंद ने एक नया फतवा जारी करते हुए कहा है कि इस्लाम के मुताबिक रक्तदान और अंगदान हराम हैं लेकिन अपने किसी निकट संबंधी का जीवन बचाने के लिए किये रक्तदान करने की अनुमति है। हालांकि इस्लामिक विद्वान देवबंद के इस फतवे से सहमत नहीं हैं। देवबंद की वेबसाइट पर हलाल और हराम संबंधी फतवों की श्रेणी के सवाल क्रमांक 27466 में पूछा गया है, ‘‘रक्तदान शिविरों में रक्तदान करना इस्लाम के हिसाब से सही है या गलत?’’ इसके जवाब में देवबंद ने कहा है, ‘‘अपने शरीर के अंगों के हम मालिक नहीं हैं, जो अंगों का मनमाना उपयोग कर सकें, इसलिए रक्तदान या अंगदान करना अवैध है।’’ इसके बाद देवबंद ने कहा है, ‘‘हालांकि अगर किसी नजदीकी संबंधी का जीवन बचाने के लिए आप रक्तदान करें, तो इसकी अनुमति है।’’ 


विद्वान फतवे से जरा भी सहमत नहीं
दूसरी ओर इस्लामिक विद्वान देवबंद के इस फतवे से जरा भी सहमत नहीं हैं। जाने-माने इस्लामिक धार्मिक नेता मौलाना वहीदुद्दीन खान ने इस फतवे को ‘पूरी तरह गलत’ बताते हुए अपने संप्रदाय के लोगों से अपील की कि वे रक्तदान से पीछे न हटें। मौलाना वहीदुदद्ीन के मुताबिक, ‘‘दारूल उलूम का यह फतवा सरासर गलत है. रक्तदान और अंगदान दोनों ही जायज हैं।’’ यह पूछे जाने पर कि क्या इस फतवे से उलट आप अपने संप्रदाय के लोगों से रक्तदान और अंगदान करने की अपील करेंगे, मौलाना वहीदुदद्ीन ने कहा, ‘‘हम समय-समय पर लोगों से अपील करते रहे हैं कि वे ज्यादा से ज्यादा मात्रा में रक्तदान करें और हम आगे भी लोगों से अपील करते रहेंगे।’’ जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय में इस्लामिक स्टडीज विभाग के अध्यक्ष प्रो. अख्तारुल वासे इस बात पर जोर देते हैं कि रक्तदान किसी का जीवन बचाने के लिए जरूरी है और इस्लामिक शोध की एक अधिकृत संस्था की ओर से पहले ही रक्तदान की अनुमति दी जा चुकी है। 

इस्लाम में अंगों को बेचने की अनुमति नहीं
प्रो. वासे के मुताबिक, ‘‘फतवे सिर्फ एक वैधानिक विचार हैं। जहां तक रक्तदान की बात है, इस्लामिक शोध की अधिकृत संस्था ‘इस्लामिक फिक्ह अकादमी’ ने पहले ही सहमति से रक्तदान की अनुमति देते हुए इसे मान्यता दी हुई है क्योंकि रक्तदान जीवन बचाने के लिए जरूरी है।’’ उन्होंने ‘भाषा’ से कहा, ‘‘इस्लाम धर्म के तहत इस बात की सहमति बनी हुई है कि शरीर में जो तत्व दोबारा बन जाता है, उसे दान करने में कोई आपत्ति नहीं है। इस्लाम में रक्त और अंगों को बेचने की अनुमति नहीं है, लेकिन ऐसे अंग को दान किया जा सकता है, जिसे देने से दाता को कोई क्षति नहीं पहुंचे।’’ वहीं लेखक असगर वजाहत ने भी इस्लाम को मानवतावादी धर्म बताते हुए लोगों से अपील की है कि वे लोगों की जीवनरक्षा के लिए ज्यादा से ज्यादा रक्तदान करें। 

वजाहत ने कहा, ‘‘सभी मुसलमान एक ही मत के मानने वाले नहीं हैं। अगर ऐसा कोई फतवा आया है, तो वह संप्रदाय विशेष के किसी मौलवी ने अपनी समसे दिया है, जिसे कोई दूसरा मौलवी पलट भी सकता है।’’ वजाहत ने कहा कि फतवों को अधिकतर लोग नहीं मानते। उन्होंने कहा, ‘‘इस्लाम मानवतावादी धर्म है, जो जीवन की रक्षा में विश्वास रखता है. मैं लोगों से भी यही कहूंगा कि वे दूसरों के जीवन की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध रहें और रक्तदान के लिए आगे आएं।’


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