मैं ध्यान में प्रवेश करके रहूंगा। यह वाक्य दोहराया जाता रहे। एक घड़ी आएगी जब आपको लगेगा, अब भीतर बिल्कुल भी श्वास नहीं है

मैं ध्यान में प्रवेश करके रहूंगा। यह वाक्य दोहराया जाता रहे। एक घड़ी आएगी जब आपको लगेगा, अब भीतर बिल्कुल भी श्वास नहीं है

 आशो

मैं संकल्प करता हूं कि मैं ध्यान में प्रवेश करके रहूंगा। यह वाक्य दोहराया जाता रहे। फिर श्वास बाहर फेंकते जाएं। एक घड़ी आएगी जब आपको लगेगा, अब भीतर बिल्कुल भी श्वास नहीं है।

तब भी जो थोड़ी है, उसे भी बाहर फेंको। आप पूरी श्वास कभी नहीं फेंक सकते हैं यानी इसमें घबराने का कोई कारण नहीं है
उन क्षणों में, जब आपके प्राण श्वास मांगते हों, अपने मन में यह भाव दोहराते रहें कि मैं ध्यान में प्रवेश करके रहूंगा। यह मेरा संकल्प है कि मैं ध्यान में प्रवेश करके रहूंगा। जितनी गहराई तक प्राण कंपित होंगे, उतनी गहराई तक आपका यह संकल्प प्रवष्टि हो जाएगा। अगर आपने संपूर्ण प्राण-कंपित हालत में इस वाक्य को दोहराया तो यह संकल्प प्रगाढ़ हो जाएगा। प्रगाढ़ का मतलब वह आपके अचेतन, अनकांशस माइंड तक प्रवष्टि हो जाएगा। इसे हम रोज ध्यान के पहले करेंगे। रात्रि में सोते समय भी आप इसे करके ही सोएंगे। जब आप सोने लगेंगे, तब भी आपके मन में यह सतत ध्वनि बनी रहे कि मैं ध्यान में प्रवष्टि होकर रहूंगा। यह मेरा संकल्प है कि मुझे ध्यान में प्रवेश करना है। यह वचन आपके मन में गूंजता रहे और आप कब सो जाएं, आपको पता न लगे। सोते समय चेतन मन तो बेहोश हो जाता है और अचेतन मन के द्वार खुलते हैं। अगर उस वक्त आपके मन में यह बात गूंजती रही तो यह अचेतन पर्तों में प्रवष्टि हो जाएगी और आप इसका परिमाण तीन दिनों में ही देख लेंगे। संकल्प को प्रगाढ़ करने का उपाय समझ लें। सबसे पहले धीमे-धीमे पूरी श्वास भर लेना। यानी पूरे प्राणों में, पूरे फेफड़ों में श्वास भर जाए, जितनी भर सकें। जब श्वास पूरी भर जाए, तब भी मन में यह भाव गूंजता रहे कि मैं संकल्प करता हूं कि ध्यान में प्रवष्टि होकर रहूंगा। यह वाक्य गूंजता ही रहे। फिर श्वास बाहर फेंकी जाए। तब भी यह वाक्य गूंजता रहे कि मैं संकल्प करता हूं कि मैं ध्यान में प्रवेश करके रहूंगा। यह वाक्य दोहराया जाता रहे। फिर श्वास बाहर फेंकते जाएं। एक घड़ी आएगी जब आपको लगेगा, अब भीतर बिल्कुल भी श्वास नहीं है। तब भी जो थोड़ी है, उसे भी बाहर फेंको। आप पूरी श्वास कभी नहीं फेंक सकते हैं यानी इसमें घबराने का कोई कारण नहीं है। इसलिए जितना आपको लगे कि अब बिल्कुल नहीं है, उस वक्त भी जो थोड़ी है, उसको भी फेंको। जब तक आपसे बने, उसे फेंकते जाएं और मन में यह गूजता रहे कि मैं संकल्प करता हूं कि ध्यान में प्रवेश करके रहूंगा। यह अदभुत प्रक्रिया है। इसके माध्यम से आपकी अचेतन पर्तों में विचार प्रवष्टि होगा, संकल्प प्रवष्टि होगा और उसके परिणाम आप अगली सुबह से ही देखेंगे।

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