शिवसेना-भाजपा गठबंधन में चल रहा तनातनी

मुंबई (ओमप्रकाश तिवारी)।

महाराष्ट्र के शिवसेना-भाजपा गठबंधन में चल रहा तनातनी का दौर अभी खत्म नहीं हुआ है, लेकिन भाजपा नेताओं ने अब भी गठबंधन बने रहने की उम्मीद छोड़ी नहीं है।

उद्धव ठाकरे द्वारा दो दिन पहले एक टीवी चैनल पर मोदी लहर को नकारने के बाद यह तनातनी शुरू हुई थी। रविवार को पार्टी के प्रदेश प्रभारी राजीव प्रताप रुड़ी द्वारा 135 सीटों की मांग के बाद स्थिति और बिगड़ गई। सोमवार को अपनी पार्टी का विजन डॉक्यूमेंट जारी करने के बाद पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए उद्धव ठाकरे ने एक बार फिर साफ कर दिया कि 135 सीटें उनकी सीमा से अधिक मांगी जा रही हैं। इतनी सीटें देकर वह अपनी पार्टी का नुकसान नहीं कर सकते। उद्धव ने अपनी पार्टी के लिए सभी पर्याय खुले रखने की बात भी कही।

दूसरी ओर भाजपा नेता विनोद तावड़े सोमवार को ऐसा कोई फार्मूला होने से भी इन्कार करते दिखे कि जिसके तहत अधिक विधायकों वाले दल का ही मुख्यमंत्री बनेगा। तावड़े का कहना है कि अब तक किसी भी विधानसभा चुनाव में शिवसेना-भाजपा गठबंधन ने मुख्यमंत्री पद के लिए किसी का नाम घोषित कर चुनाव नहीं लड़ा। मुख्यमंत्री चुनने का अधिकार राज्य की जनता को है। इसलिए इसका फैसला चुनाव के बाद ही होना चाहिए। तावड़े के इस बयान को भाजपा के नए पैंतरे के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि अब तक भाजपा मुख्यमंत्री पद पर अपना दावा मजबूत करने के लिए ही शिवसेना से अधिक सीटों की मांग करती दिख रही थी।

हालांकि सोमवार को दिन भर शिवसेना-भाजपा के बीच कोई संवाद नहीं हुआ। न ही देर रात तक ऐसे किसी संवाद की उम्मीद है। इसके बावजूद दोनों दलों के बड़े नेता गठबंधन टूटने की आशंका से इन्कार कर रहे हैं। भाजपा नेताओं की एक बैठक के बाद सोमवार को प्रदेश भाजपा प्रभारी राजीव प्रताप रुड़ी ने दोनों दलों के बीच किसी प्रकार के तनाव से इन्कार किया है। उनके अनुसार शिवसेना-भाजपा एवं अन्य साथी दलों के बीच सीट समझौते का मसला जल्द सुलझा लिया जाएगा एवं महागठबंधन के सभी दल मिलकर ही चुनाव लड़ेंगे।

 

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